राम का नाम लो,
या श्याम की पूजा करलो,
कोई अंतर नही दोनो मे,
भरोसा करलो ॥
जीवन मे जप लो बस दो ही नाम,
राम कहो कहलो श्याम,
सुमिरन जो दिन रैन इनका करे,
संकट रहेगा उनसे परे,
राम का नाम लो या श्याम की ॥
राघव ने रावण का तोड़ा है मान,
माधव ने छीने है कंस के प्राण,
एक तो बृज मे माखन चुराये,
दूजे ने बैर शबरी के खाये,
राम का नाम लो या श्याम की ॥
राम का नाम लो,
या श्याम की पूजा करलो,
कोई अंतर नही दोनो मे,
भरोसा करलो ॥
कार्तिक मास माहात्म्य कथा: अध्याय 20 (Kartik Mas Mahatmya Katha: Adhyaya 20)
नर्मदा अष्टकम (Narmada Ashtakam)
महिमा तेरी समझ सका ना, कोई भोले शंकर - भजन (Mahima Teri Samjh Saka Na Koi Bhole Shankar)
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