ओ मोरछड़ी वाले,
कब तक तेरी राह तकूँ,
लाज बचा ले बाबा,
हारे का सहारा तू ॥
कैसे कहूं तुझे,
कितना मैं चाहूँ,
हर पल मैं बाबा,
तुम्ही को बुलाऊँ,
तुम बिन जिया मोरा,
लागे कहीं ना,
चरणों से तेरे,
कहीं नहीं जाऊं,
ओ शीश के दानी मेरे,
तेरी खातिर आया हूँ,
बिगड़ी बनादे बाबा,
हारे का सहारा तू,
लाज बचा ले बाबा,
हारे का सहारा तू ॥
रींगस के कण कण में,
तुम्ही हो समाये,
भक्तों के दिल में,
तुम्ही हो बसाये,
आता रहूँगा,
वादा है मेरा,
जब जब तू मुझको,
खाटू बुलाये,
दिन भर तुम साथ मेरे,
सपनो में भी आया करो,
किस्मत बना दे बाबा,
हारे का सहारा तू,
लाज बचा ले बाबा,
हारे का सहारा तू ॥
ओ मोरछड़ी वाले,
कब तक तेरी राह तकूँ,
लाज बचा ले बाबा,
हारे का सहारा तू ॥
कार्तिक मास माहात्म्य कथा: अध्याय 3 (Kartik Mas Mahatmya Katha: Adhyaya 3)
आरती: भगवान श्री शीतलनाथ जी (Arti Bhagwan Shri Sheetalnath Ji)
रणधीर के प्रश्न तथा जाम्भोजी के उत्तर








