कबहुँ ना छूटी छठि मइया,
हमनी से बरत तोहार
हमनी से बरत तोहार
तहरे भरोसा हमनी के,
छूटी नाही छठ के त्योहार
छूटी नाही छठ के त्योहार
अपने सरन में ही रखिह,
दिह आसिस हज़ार
दिह आसिस हज़ार
गोदिया भराईल छठी मइय्या,
बाटे राऊर किरपा अपार
बाटे राऊर किरपा अपार
चाहें रहब देसवा बिदेसवा,
छठ करब हम हर बार
छठ करब हम हर बार
डूबतो सुरुज के जे पूजे,
इहे बाटे हमर बिहार
इहे बाटे हमर बिहार
फलवा दउरवा सजाके,
अईनी हम घाट पे तोहार
अईनी हम घाट पे तोहार
सत्यवादी राजा हरिश्चन्द्र भाग 2
शनि प्रदोष व्रत कथा (Shani Pradosh Vrat Katha)
दिहनी अरघ छठी मईया,
करीं हमर आरती स्वीकार
करीं हमर आरती स्वीकार
कबहुँ ना छूटी छठि मइया,
हमनी से बरत तोहार
हमनी से बरत तोहार
तहरे भरोसा हमनी के,
छूटी नाही छठ के त्योहार
छूटी नाही छठ के त्योहार
छूटी नाही छठ के त्योहार
छूटी नाही छठ के त्योहार
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