ज्योति कलश छलके
ज्योति कलश छलके
ज्योति कलश छलके
ज्योति कलश छलके
हुए गुलाबी, लाल सुनहरे
रंग दल बादल के
ज्योति कलश छलके
घर आंगन वन उपवन उपवन
करती ज्योति अमृत के सींचन
मंगल घट ढल के
मंगल घट ढल के
ज्योति कलश छलके
पात पात बिरवा हरियाला
धरती का मुख हुआ उजाला
सच सपने कल के
सच सपने कल के
ज्योति कलश छलके
ऊषा ने आँचल फैलाया
फैली सुख की शीतल छाया
नीचे आँचल के
नीचे आँचल के
ज्योति कलश छलके
ज्योति यशोदा धरती मैय्या
नील गगन गोपाल कन्हैय्या
श्यामल छवि झलके
श्यामल छवि झलके
ज्योति कलश छलके
श्री जगन्नाथ संध्या आरती (Shri Jagganath Sandhya Aarti)
सावन भजन: आई बागों में बहार, झूला झूले राधा प्यारी (Aai Bhagon Me Bahar Jhula Jhule Radha Rani)
मेरे तो आधार हैं, भोलेनाथ के चरणारविन्द - भजन (Mere To Aadhar Hai Bholenath Ke Charnarvind)
अम्बर कुमकुम कण बरसाये
फूल पँखुडियों पर मुस्काये
बिन्दु तुहिन जल के
बिन्दु तुहिन जल के
ज्योति कलश छलके








