ॐ शब्द सोऽहं ध्यावे,
स्वामी शब्द सोऽहं ध्यावे ।
धूप दीप ले आरती,
निज हरि गुण गावे ।
मंदिर मुकुट त्रिशुल ध्वजा,
धर्मों की फ हरावे ।
झालर शंख टिकोरा,
नौपत घुररावे ।
तीर्थ तालवे गुरु की समाधि,
परसे सुरग जावे ।
अड़सठ तीरथ को फ ल,
समराथल पावे ।
मंझ फ ागण शिवरात,
जातरी रलमिल सब आवे ।
झिगमिग जोत समराथल,
शिम्भू के मन भावे ।
कुमार मैने देखे, सुंदर सखी दो कुमार - भजन (Bhajan: Kumar Maine Dekhe, Sundar Sakhi Do Kumar)
चित्तौड़ की कथा भाग 2(JambhBhakti.com)
जय शनि देवा - श्री शनिदेव आरती (Aarti Shri Shani Jai Jai Shani Dev)
धर्मी करे आनंद भवन पर,
पापी थररावे ।
राजव शरण गुरु की,
क्यूं मन भटकावे ।
Post Views: 383








