गजमुखं द्विभुजं देवा लम्बोदरं: भजन (Gajmukham Dvibhujam Deva Lambodaram)

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गजमुखं द्विभुजं देवा लम्बोदरं,
भालचंद्रं देवा देव गौरीशुतं ॥

कौन कहते है गणराज आते नही,
भाव भक्ति से उनको बुलाते नही ॥

कौन कहते है गणराज खाते नही,
भोग मोदक का तुम खिलाते नही ॥

कौन कहते है गणराज सोते नही,
माता गौरा के जैसे सुलाते नही ॥

कौन कहते है गणराज नाचते नही,
रिद्धि सिद्धि के जैसे नचाते नही ॥

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गजमुखं द्विभुजं देवा लम्बोदरं,
भालचंद्रं देवा देव गौरीशुतं ॥

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Sandeep Bishnoi

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