फागण को महीनो,
लिख दीन्यो बाबा जी के नाम,
कोई काम नहीं दूजो,
बस बोलां जय श्री श्याम ॥
खाटू की नगरिया,
सजगी निराली जी,
गलियां गलियां गूंजे,
म्हारे श्याम धणी रो नाम ॥
बेगा सा चालो,
श्याम धणी के द्वार,
बाबो बैठ्यो बैठ्यो,
जोवे टाबरिया री बाट ॥
ऐसो तो नज़ारो,
देख्यो सुन्यो ना कोई द्वार,
है स्वर्ग से भी सुन्दर,
म्हारे श्याम धणी रो धाम ॥
पुरुषोत्तम मास माहात्म्य कथा: अध्याय 29 (Purushottam Mas Mahatmya Katha: Adhyaya 29)
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फागण को महीनो,
लिख दीन्यो बाबा जी के नाम,
कोई काम नहीं दूजो,
बस बोलां जय श्री श्याम ॥
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