देखता ही बाबो म्हाने, बाथि भरसी: भजन (Dekhta Hi Babo Mhane Bathi Bharsi)

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जाणे कितने दिन पाछे,
आज बाबो मिलसी,
म्हाने बाबो मिलसी,
देखता ही बाबो म्हाने,
बाथि भरसी ॥

प्रेमियाँ सु प्रेम करनो,
बाबा को स्वभाव है,
टाबरिया ने देख आवतो,
बाबो भी हरसाव है,
बिन टाबरां के साँवरे के,
कईयां सरसी,
देखता ही बाबो म्हाणे,
बाथि भरसी ॥

साँवरियो भी तो तरसे है,
टाबरिया के प्यार ने,
रोक ना पावे लेवण आवे,
यो मंदिर के बारने,
होसी धुँधलो नज़ारों,
म्हारी आँख्या झरसी,
देखता ही बाबो म्हाणे,
बाथि भरसी ॥

माँगे है विदाई जद,
काळजै को टुकड़ो,
उतर सो जावे ‘माधव’,
बाप जी को मुखड़ों,
म्हाने पाछा जाता देख,
अणकी आँख्या भरसी,
थाम लेसी हाथ,
ओजु बांथी भरसी ॥

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जाणे कितने दिन पाछे,
आज बाबो मिलसी,
म्हाने बाबो मिलसी,
देखता ही बाबो म्हाने,
बाथि भरसी ॥

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Sandeep Bishnoi

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