
चलो मन वृन्दावन की ओर – भजन (Chalo Mann Vrindavan Ki Aur)
चलो मन वृन्दावन की ओर, प्रेम का रस जहाँ छलके है, कृष्णा नाम से भोर, चलो मन वृंदावन की ओर ॥ भक्ति की रीत जहाँ

चलो मन वृन्दावन की ओर, प्रेम का रस जहाँ छलके है, कृष्णा नाम से भोर, चलो मन वृंदावन की ओर ॥ भक्ति की रीत जहाँ

तेरा किसने किया श्रृंगार सांवरे, तू लगे दूल्हा सा दिलदार सांवरे । तेरा किसने किया श्रृंगार सांवरे, तू लगे दूल्हा सा दिलदार सांवरे । मस्तक

भजहु रे मन श्री नंद नंदन अभय-चरणार्विन्द रे दुर्लभ मानव-जन्म सत-संगे तारो ए भव-सिंधु रे भजहु रे मन श्री नंद नंदन अभय-चरणार्विन्द रे शीत तप

हमारे दो ही रिश्तेदार, एक हमारी राधा रानी, दूजे बांके बिहारी सरकार। हमारे दो ही रिश्तेदार, सेठ हमारे बांके बिहारी, सेठानी वृशभानु दुलारी, जो कोई

घनश्याम तेरी बंसी, पागल कर जाती है, मुस्कान तेरी मोहन, घायल कर जाती है ॥ घनश्याम तेरी बंसी, पागल कर जाती है, मुस्कान तेरी मोहन,

श्याम तेरी बंसी पुकारे राधा नाम लोग करें मीरा को यूँ ही बदनाम साँवरे की बंसी को बजने से काम राधा का भी श्याम वोतो

मेरे बांके बिहारी लाल, तू इतना ना करिओ श्रृंगार, नजर तोहे लग जाएगी । तेरी सुरतिया पे मन मोरा अटका । प्यारा लागे तेरा पीला
