
बंसी बजा के मेरी निंदिया चुराई: भजन (Bansi Bajake Meri Nindiya Churai)
बंसी बजा के मेरी निंदिया चुराई, लाडला कन्हैया मेरा कृष्ण कन्हाई, कुञ्ज गली में ढूंढें तुम्हे राधा प्यारी, कहाँ गिरधारी मेरे कहाँ गिरधारी ॥ आँख

बंसी बजा के मेरी निंदिया चुराई, लाडला कन्हैया मेरा कृष्ण कन्हाई, कुञ्ज गली में ढूंढें तुम्हे राधा प्यारी, कहाँ गिरधारी मेरे कहाँ गिरधारी ॥ आँख

मनमोहन तुझे रिझाऊं, तुझे नित नए लाड़ लड़ाऊं, बसा के तुझे नैनन में, छिपा के तुझे नैनन में ॥ गीत बन जाऊं तेरी, बांसुरी के

था बिन दीनानाथ, आंगली कुण पकड़सी जी, कुण पकड़सी जी सांवरा, कुण पकड़सी जी, था बिन दिनानाथ, आंगली कुण पकड़सी जी, म्हारी पीड़ हरो घनश्याम

तू ही कन्हैया तू ही लखदातार है, लखदातार है तू लीले का सवार है, सांवरे तेरी तो लीला अपरम्पार है, मोहना तू ही लखदातार है।

गोविन्द जय-जय, गोपाल जय-जय । राधा-रमण हरि, गोविन्द जय-जय ॥ १ ॥ ॥ गोविन्द जय-जय… ॥ ब्रह्माकी जय-जय, विष्णूकी जय-जय । उमा- पति शिव शंकरकी

मेरो छोटो सो लड्डू गोपाल, सखी री बड़ो प्यारो है। मेरो छोटो सो लड्डू गोपाल, सखी री बड़ो प्यारो है। अँखियाँ मटकाये जब सुबह जागे,

प्रभुजी मोरे/मेरे अवगुण चित ना धरो, समदर्शी प्रभु नाम तिहारो, चाहो तो पार करो । एक लोहा पूजा मे राखत, एक घर बधिक परो ।
