
भगवन लौट अयोध्या आए.. (Bhagwan Laut Ayodhya Aaye)
भगवन चौदह बरस वन वास, भगवन लौट अयोध्या आए । भगवन चौदह बरस वन वास, भगवन लौट अयोध्या आए । वो बागन-बागन आए, और सूखे

भगवन चौदह बरस वन वास, भगवन लौट अयोध्या आए । भगवन चौदह बरस वन वास, भगवन लौट अयोध्या आए । वो बागन-बागन आए, और सूखे

परिश्रम करे कोई कितना भी लेकिन, कृपा के बिना काम चलता नहीं है । निराशा निशा नष्ट होती ना तब तक, दया भानु जब तक

हरि हरि, हरि हरि, सुमिरन करो, हरि चरणारविन्द उर धरो हरे राम हरे राम रामा रामा हरे हरे हरे कृष्णा करे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे

राम नाम सोहि जानिये, जो रमता सकल जहान घट घट में जो रम रहा, उसको राम पहचान तेरा रामजी करेंगे बेड़ा पार, उदासी मन काहे

जयपुर से लाई मैं तो, चुनरी रंगवाई के, गोटा किनारी अपने, हाथो लगवाई के, मैया को ओढ़ाउंगी, द्वारे पे जाइके ॥ चंदा की किरणों से,

भेजा है बुलावा, तूने शेरा वालिए ओ मैया तेरे दरबार, में हाँ तेरे दीदार, कि मैं आऊंगा कभी न फिर जाऊँगा भेजा है बुलावा, तूने

चौसठ जोगणी रे भवानी, देवलिये रमजाय, घूमर घालणि रे भवानी, देवलिये रमजाय ॥ देवलिये रमजाय म्हारे, आंगणिये रमजाय, चौसठ जोगणी रे भवानी, देवलिये रमजाय, घूमर
