
बनवारी रे! जीने का सहारा तेरा नाम रे: भजन (Banwari Re Jeene Ka Sahara Tera Naam Re)
बनवारी रे, जीने का सहारा तेरा नाम रे, मुझे दुनिया वालों से क्या काम रे ॥ झूठी दुनिया, झूठे बंधन, झूठी है ये माया, झूठा

बनवारी रे, जीने का सहारा तेरा नाम रे, मुझे दुनिया वालों से क्या काम रे ॥ झूठी दुनिया, झूठे बंधन, झूठी है ये माया, झूठा

जरा इतना बता दे कान्हा, कि तेरा रंग काला क्यों । श्लोक- श्याम का काला बदन, और श्याम घटा से काला, शाम होते ही, गजब

फूलों में सज रहे हैं, श्री वृन्दावन बिहारी, और साथ सज रही है, वृषभानु की दुलारी ॥ टेढ़ा सा मुकुट सर पर, रखा है किस

नटवर नागर नंदा, भजो रे मन गोविंदा, श्याम सुंदर मुख चंदा, भजो रे मन गोविंदा, नटवर नागर नन्दा, भजो रे मन गोविंदा, श्याम सुंदर मुख

जरा देर ठहरो राम तमन्ना यही है अभी हमने जी भर के देखा नहीं है ॥ कैसी घड़ी आज जीवन की आई । अपने ही

नगरी हो अयोध्या सी, रघुकुल सा घराना हो । और चरण हो राघव के, जहाँ मेरा ठिकाना हो ॥ हो त्याग भारत जैसा, सीता सी

काल के पंजे से माता बचाओ, जय माँ अष्ट भवानी, काल के पंजे से माता बचाओ, जय माँ अष्ट भवानी । हे नाम रे सबसे
