
जल जाये जिह्वा पापिनी, राम के बिना: भजन (Jal Jaaye Jihwa Papini, Ram Ke Bina)
राम बिना नर ऐसे जैसे, अश्व लगाम बिना । जल जाये जिह्वा पापिनी, राम के बिना । जल जाये जिह्वा पापिनी, राम के बिना ।

राम बिना नर ऐसे जैसे, अश्व लगाम बिना । जल जाये जिह्वा पापिनी, राम के बिना । जल जाये जिह्वा पापिनी, राम के बिना ।

राम जपते रहो, काम करते रहो । वक्त जीवन का, यूँही निकल जायेगा । अगर लगन सच्ची, भगवन से लग जायेगी । तेरे जीवन का

जिस दिल में आपकी याद रहे प्रभु दिल मेरा वो दिल करदो राही न सही मंजिल की तरफ राही की तरफ मंजिल करदो मन में

पंथ निहारत, डगर बहारथ, होता सुबह से शाम, कहियो दर्शन दीन्हे हो, भीलनियों के राम । पंथ निहारत, डगर बहारथ, होता सुबह से शाम, कहियो

राम भजा सो जीता जग में, राम भजा सो जीता रे। हृदय शुद्ध नही कीन्हों मूरख, कहत सुनत दिन बीता रे। राम भजा सो जीता

भगवन चौदह बरस वन वास, भगवन लौट अयोध्या आए । भगवन चौदह बरस वन वास, भगवन लौट अयोध्या आए । वो बागन-बागन आए, और सूखे

परिश्रम करे कोई कितना भी लेकिन, कृपा के बिना काम चलता नहीं है । निराशा निशा नष्ट होती ना तब तक, दया भानु जब तक
