
राख शरण गिरधारी साँवरे: भजन (Rakh Sharan Girdhari Sanware)
राख शरण गिरधारी साँवरे, मैं बिना मोल को चेरो, हरी मैं जैसो तेसो तेरो, श्याम मैं जैसो तेसो तेरो ॥ आप ठुकराओगे तो प्यारे, हम

राख शरण गिरधारी साँवरे, मैं बिना मोल को चेरो, हरी मैं जैसो तेसो तेरो, श्याम मैं जैसो तेसो तेरो ॥ आप ठुकराओगे तो प्यारे, हम

अब ना बानी तो फिर ना बनेगी नर तन बार बार नहीं मिलता अब ना बानी तो फिर ना बनेगी नर तन बार बार नहीं

तृष्णा ना जाये मन से ॥ दोहा – मथुरा वृन्दावन सघन, और यमुना के तीर, धन्य धन्य माटी सुघर, धन्य कालिंदी नीर ॥ कृष्णा बोलो

हर बात को भूलो मगर, माँ बाप मत भूलना, उपकार इनके लाखों है, इस बात को मत भूलना ॥ धरती पर देवो को पूजा, भगवान

॥ भाग १ ॥ कल्पतरु पुन्यातामा, प्रेम सुधा शिव नाम हितकारक संजीवनी, शिव चिंतन अविराम पतिक पावन जैसे मधुर, शिव रसन के घोलक भक्ति के

मन फूला फूला फिरे, जगत में कैसा नाता रे ॥ मन फूला फूला फिरे, जगत में कैसा नाता रे ॥ माता कहे यह पुत्र हमारा,

मन मोहन मूरत तेरी प्रभु, मिल जाओगे आप कहीं ना कहीं । यदि चाह हमारे दिल में है, तूम्हे ढूँढ ही लेंगे कहीं ना कहीं
