
अजब हैरान हूं भगवन! तुम्हें कैसे रिझाऊं मैं: भजन (Ajab Hairan Hoon Bhagawan Tumhen Kaise Rijhaon Main)
अजब हैरान हूं भगवन! तुम्हें कैसे रिझाऊं मैं । कोई वस्तु नहीं ऐसी, जिसे सेवा में लाऊं मैं ॥ करें किस तौर आवाहन कि, तुम

अजब हैरान हूं भगवन! तुम्हें कैसे रिझाऊं मैं । कोई वस्तु नहीं ऐसी, जिसे सेवा में लाऊं मैं ॥ करें किस तौर आवाहन कि, तुम

ईश्वर को जान बन्दे, मालिक तेरा वही है, करले तू याद दिल से, हर जाम वो सही है । ईष्वर को जान बन्दे, मालिक तेरा

भरोसा कर तू ईश्वर पर, तुझे धोखा नहीं होगा । यह जीवन बीत जायेगा, तुझे रोना नहीं होगा ॥ कभी सुख है कभी दुख है,

बन्दे तेरा रे नही रे ठिकाना, एक ना एक रोज, पडे़गा तुझे जाना रे, बन्दें तेरा रे नहीं रे ठिकाना ॥ बीत गया बचपन ढली

हरि कर दीपक, बजावें संख सुरपति, गनपति झाँझ, भैरों झालर झरत हैं । नारदके कर बीन, सारदा गावत जस, चारिमुख चारि वेद, बिधि उचरत हैं

ओम अनेक बार बोल, प्रेम के प्रयोगी। है यही अनादि नाद, निर्विकल्प निर्विवाद। भूलते न पूज्यपाद, वीतराग योगी। ॥ ओम अनेक बार बोल..॥ वेद को

हरी दर्शन की प्यासी अखियाँ अखियाँ हरी दर्शन की प्यासी ॥ देखियो चाहत कमल नैन को, निसदिन रहेत उदासी, अखियाँ हरी दर्शन की प्यासी ॥
