
जगदीश ज्ञान दाता: प्रार्थना (Jagadish Gyan Data: Prarthana)
जगदीश ज्ञान दाता, सुख मूल शोकहारी । भगवन् ! तुम्हीं सदा हो, निष्पक्ष न्यायकारी ॥ सब काल सर्व ज्ञाता, सविता पिता विधाता । सब में

जगदीश ज्ञान दाता, सुख मूल शोकहारी । भगवन् ! तुम्हीं सदा हो, निष्पक्ष न्यायकारी ॥ सब काल सर्व ज्ञाता, सविता पिता विधाता । सब में

हे जग स्वामी, अंतर्यामी, तेरे सन्मुख आता हूँ । सन्मुख आता, मैं शरमाता भेंट नहीं कुछ लाता हूँ ॥ हे जग स्वामी…॥ पापी जन हूँ,

कृपालु भगवन् कृपा हो करते, इसी कृपा से नर तन मिला है । दयालु भगवन् दया हो करते, इसी दया से ये मन मिला है

धनवानों का मान है जग में, निर्धन का कोई मान नहीं । ए मेरे भगवन बता दे, निर्धन क्या इन्सान नहीं ॥ पास किसी के

दिखाऊं कोनी लाड़लो, नजर लग जाए, नजर लग जाए रे, जुलम होय जाए, दिखाऊँ कोनी लाड़लो, नजर लग जाए ॥ विषधर तेरे गले में लिपटे,

तेरी अंखिया हैं जादू भरी, बिहारी मैं तो कब से खड़ी ॥ सुनलो मेरे श्याम सलोना, तुमने ही मुझ पर, कर दिया टोना, मेरी अंखियाँ

लाज रखो हे कृष्ण मुरारी, हे गिरधारी हे बनवारी, हे गिरधारी हे बनवारी, लाज रखों हे कृष्ण मुरारी ॥ कहता है खुद को बलशाली, कहता
