
हनुमान चालीसा (Hanuman Chalisa)
॥ श्री हनुमान चालीसा लिरिक्स ॥ ॥ दोहा॥ श्रीगुरु चरन सरोज रज निज मनु मुकुरु सुधारि । बरनउँ रघुबर बिमल जसु जो दायकु फल चारि

॥ श्री हनुमान चालीसा लिरिक्स ॥ ॥ दोहा॥ श्रीगुरु चरन सरोज रज निज मनु मुकुरु सुधारि । बरनउँ रघुबर बिमल जसु जो दायकु फल चारि

॥ दोहा॥ श्री गुरु चरणन ध्यान धर, सुमीर सच्चिदानंद । श्याम चालीसा भजत हूँ, रच चौपाई छंद । ॥ चौपाई ॥ श्याम-श्याम भजि बारंबारा ।

श्री सूर्य देव चालीसा ॥ ॥दोहा॥ कनक बदन कुण्डल मकर, मुक्ता माला अङ्ग, पद्मासन स्थित ध्याइए, शंख चक्र के सङ्ग॥ ॥चौपाई॥ जय सविता जय जयति

॥ दोहा ॥ जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल मूल सुजान । कहत अयोध्यादास तुम, देहु अभय वरदान ॥ ॥ चौपाई ॥ जय गिरिजा पति दीन

घर घर बधाई बाजे रे देखो, घर घर बधाई बाजे रे, ढोलक नगाड़ा वाजे रे देखो, ढोलक नगाड़ा वाजे रे जन में अयोध्या में राम

नवजात शिशु के जन्म बधाई की खुशी मे यह गीत या भजन भारत के जैन समाज मे बहुत लोकप्रिय है! बजे कुण्डलपर में बधाई, के

जगन्नाथ जगन्नाथ जगन्नाथ जगन्नाथ चारों धाम में सबसे बड़ा है ,जगन्नाथ धाम जगन्नाथ भगवान की, महिमा अपरम्पार भक्तों को दर्शन देते,करते उनके काम। कर लो
