
तत्त्वमसि महावाक्य (Tatwamasi)
तत्त्वमसि (तत् त्वम् असि) भारत के शास्त्रों व उपनिषदों में वर्णित महावाक्यों में से एक है, जिसका शाब्दिक अर्थ है, वह तुम ही हो। वह

तत्त्वमसि (तत् त्वम् असि) भारत के शास्त्रों व उपनिषदों में वर्णित महावाक्यों में से एक है, जिसका शाब्दिक अर्थ है, वह तुम ही हो। वह

गजाननं भूत गणादि सेवितं, कपित्थ जम्बू फल चारू भक्षणम् । उमासुतं शोक विनाशकारकम्, नमामि विघ्नेश्वर पाद पंकजम् ॥

गौरीनन्दन गजानना गौरीनन्दन गजानना गिरिजानन्दन निरञ्जना गिरिजानन्दन निरञ्जना पार्वतीनन्दन शुभानना पार्वतीनन्दन शुभानना शुभानना शुभानना शुभानना शुभानना पाहि प्रभो मां पाहि प्रसन्नाम् पाहि प्रभो मां पाहि

गणनायकाय गणदेवताय गणाध्यक्षाय धीमहि । गुणशरीराय गुणमण्डिताय गुणेशानाय धीमहि । गुणातीताय गुणाधीशाय गुणप्रविष्टाय धीमहि । एकदंताय वक्रतुण्डाय गौरीतनयाय धीमहि । गजेशानाय भालचन्द्राय श्रीगणेशाय धीमहि ॥

॥ श्रीसरस्वती अष्टोत्तरनामावली ॥ ॐ सरस्वत्यै नमः । ॐ महाभद्रायै नमः । ॐ महामायायै नमः । ॐ वरप्रदायै नमः । ॐ श्रीप्रदायै नमः । ॐ

विद्यां ददाति विनयं, विनयाद् याति पात्रताम् । पात्रत्वात् धनमाप्नोति, धनात् धर्मं ततः सुखम् ॥ हिन्दी भावार्थ: विद्या विनय देती है, विनय से पात्रता आती है,

॥ श्रीमहासरस्वतीसहस्रनामस्तोत्रम् ॥ ध्यानम् श्रीमच्चन्दनचर्चितोज्ज्वलवपुः शुक्लाम्बरा मल्लिका- मालालालित कुन्तला प्रविलसन्मुक्तावलीशोभना। सर्वज्ञाननिधानपुस्तकधरा रुद्राक्षमालाङ्किता वाग्देवी वदनाम्बुजे वसतु मे त्रैलोक्यमाता शुभा॥ श्रीनारद उवाच – भगवन्परमेशान सर्वलोकैकनायक। कथं सरस्वती
