
माँ तुलसी अष्टोत्तर-शतनाम-नामावली (Tulsi Ashtottara Shatnam Namavali)
॥ श्रीतुलसी अष्टोत्तरशतनामावली ॥ ॐ श्री तुलस्यै नमः । ॐ नन्दिन्यै नमः । ॐ देव्यै नमः । ॐ शिखिन्यै नमः । ॐ धारिण्यै नमः ।

॥ श्रीतुलसी अष्टोत्तरशतनामावली ॥ ॐ श्री तुलस्यै नमः । ॐ नन्दिन्यै नमः । ॐ देव्यै नमः । ॐ शिखिन्यै नमः । ॐ धारिण्यै नमः ।

गायत्री मंत्र को हिन्दू धर्म में सबसे उत्तम मंत्र माना जाता है। ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्यः धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् ॥ इस

ॐ सर्वेशां स्वस्तिर्भवतु । सर्वेशां शान्तिर्भवतु । सर्वेशां पुर्णंभवतु । सर्वेशां मङ्गलंभवतु । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥

अलसस्य कुतः विद्या, अविद्यस्य कुतः धनम्। अधनस्य कुतः मित्रम्अ, मित्रस्य कुतः सुखम् ॥ हिन्दी भावार्थ: आलसी इन्सान को विद्या कहाँ। विद्याविहीन/अनपढ़/मूर्ख को धन कहाँ। धनविहीन/निर्धन

सम्पूर्ण प्रातः स्मरण, जो कि दैनिक उपासना से उदधृत है, आप सभी इसे अपने जीवन में उतारें एवं अपने अनुजो को भी इससे अवगत कराएं।

ॐ भैरवाय नमः ॐ भूतनाथाय नमः ॐ भूतात्मने नमः ॐ भूतभावनाय नमः ॐ क्षेत्रज्ञाय नमः ॐ क्षेत्रपालाय नमः ॐ क्षेत्रदाय नमः ॐ क्षत्रियाय नमः ॐ

अयमात्मा ब्रह्म भारत के पुरातन हिंदू शास्त्रों व उपनिषदों में वर्णित महावाक्य है, जिसका शाब्दिक अर्थ है यह आत्मा ब्रह्म है। उस स्वप्रकाशित प्रत्यक्ष शरीर
