
श्री तुलसी नामाष्टक स्तोत्रम् (Shri Tulsi Namashtakam Strotam)
वृंदा, वृन्दावनी, विश्वपुजिता, विश्वपावनी । पुष्पसारा, नंदिनी च तुलसी, कृष्णजीवनी ॥ एत नाम अष्टकं चैव स्त्रोत्र नामार्थ संयुतम । य:पठेत तां सम्पूज्य सोभवमेघ फलं लभेत

वृंदा, वृन्दावनी, विश्वपुजिता, विश्वपावनी । पुष्पसारा, नंदिनी च तुलसी, कृष्णजीवनी ॥ एत नाम अष्टकं चैव स्त्रोत्र नामार्थ संयुतम । य:पठेत तां सम्पूज्य सोभवमेघ फलं लभेत

प्रज्ञानं ब्रह्म जिसका शाब्दिक अर्थ है ज्ञान ही ब्रह्म है। यह भारत के पुरातन हिंदू शास्त्र ‘ऋग्वेद’ का ‘महावाक्य’ है चार वेदों में एक-एक महावाक्य

ॐ प्रकृत्यै नमः ॥ ॐ विकृत्यै नमः ॥ ॐ विद्यायै नमः ॥ ॐ सर्वभूतहितप्रदायै नमः ॥ ॐ श्रद्धायै नमः ॥ ॐ विभूत्यै नमः ॥ ॐ

॥ अथ श्रीलक्ष्मीसहस्रनामावलिः ॥ ॐ नित्यागतायै नमः । ॐ अनन्तनित्यायै नमः । ॐ नन्दिन्यै नमः । ॐ जनरञ्जिन्यै नमः । ॐ नित्यप्रकाशिन्यै नमः । ॐ

ॐ भैरवाय नमः ॐ भूतनाथाय नमः ॐ भूतात्मने नमः ॐ भूतभावनाय नमः ॐ क्षेत्रज्ञाय नमः ॐ क्षेत्रपालाय नमः ॐ क्षेत्रदाय नमः ॐ क्षत्रियाय नमः ॐ

शंख को पूजा कार्य मे सम्लित करने हेतु, निम्न लिखित मंत्र का जप करना चाहिए। त्वंपुरा सागरोत्पन्न विष्णुनाविघृतःकरे । देवैश्चपूजितः सर्वथौपाच्चजन्यमनोस्तुते ॥ सरल भाव: त्वं

श्रीदत्तात्रेयाष्टोत्तरशतनामावली | श्री दत्तात्रेय 108 नाम ॐ श्रीदत्ताय नमः । ॐ देवदत्ताय नमः । ॐ ब्रह्मदत्ताय नमः । ॐ विष्णुदत्ताय नमः । ॐ शिवदत्ताय नमः
