
दर्द किसको दिखाऊं कन्हैया – भजन (Dard Kisako Dikhaun Kanaiya)
दर्द किसको दिखाऊं कन्हैया, कोई हमदर्द तुमसा नहीं है, दुनिया वाले नमक है छिड़कते, कोई मरहम लगाता नहीं है । दर्द किसकों दिखाऊँ कन्हैया, कोई

दर्द किसको दिखाऊं कन्हैया, कोई हमदर्द तुमसा नहीं है, दुनिया वाले नमक है छिड़कते, कोई मरहम लगाता नहीं है । दर्द किसकों दिखाऊँ कन्हैया, कोई

आपने अपना बनाया मेहरबानी आपकी, हम तो इस काबिल ही ना थे, ये कदर दानी आपकी, आपने अपना बनाया मेहरबानी आपकी॥ मैं तो तुम से

सांवरा जब मेरे साथ है, हमको डरने की क्या बात है । इसके रहते कोई कुछ कहे, बोलो किसकी यह औकात है ॥ छाये काली

अपने भगत की, आँख में आँसू, देख ना पाएगा, जब जब भी श्याम दिवानों के, सर पे संकट मंडराएगा, कन्हैया दौड़ा आएगा, अपने भगतों के

जब मन मेरा घबराए, कोई राह नज़र ना आये, ये हाथ पकड़ कर मेरा, मुझे मंज़िल तक ले जाये, ये बाबा तो मेरा रखवाला है,

वो नाव कैसे चले जिसका कोई खेवनहार ना हो, तेरा गुणगान कैसे करूँ जहाँ पर तेरा दीदार ना हो । बाबा तुम जो मिलगए, फूलों

दोहा: झोली में अब सांवरे, डाल दया की भीख, तेरे सिवा कोई नहीं, अब मेरे नज़दीक । आया हूँ मैं दरबार तुम्हारे, सारे जग से
