
शीश गंग अर्धंग पार्वती: भजन (Sheesh Gang Ardhang Parvati)
शीश गंग अर्धंग पार्वती, सदा विराजत कैलासी । नंदी भृंगी नृत्य करत हैं, धरत ध्यान सुर सुखरासी ॥ शीतल मन्द सुगन्ध पवन, बह बैठे हैं

शीश गंग अर्धंग पार्वती, सदा विराजत कैलासी । नंदी भृंगी नृत्य करत हैं, धरत ध्यान सुर सुखरासी ॥ शीतल मन्द सुगन्ध पवन, बह बैठे हैं

एक दिन वो भोले भंडारी भजन लिरिक्स के माध्यम से भगवान शिव शिव का भगवान विष्णु के अवतार बाल रूप श्री कृष्ण के साथ लीला

मेरी अखियाँ तरस रही, भोले का दीदार पाने को, मैं भगत दीवाना तेरा, दिखा दूंगा ज़माने को, मेरी अँखियाँ तरस रही, भोले का दीदार पाने

कावड़िया ले चल गंग की धार ॥ दोहा – भस्म रमाए बैठे है शंकर, सज धज के दरबार, कावड़िया ले आओ कावड़, राह तके सरकार

थोड़ा देता है या ज्यादा देता है, हमको तो जो कुछ भी देता, भोला देता है, थोड़ा देता हैं या ज्यादा देता हैं ॥ हमारे

महाकाल बाबा उज्जैन वाले, जीवन मेरा तेरे हवाले, दर दर भटका पड़ गए छाले, मुझको तू उज्जैन बुलाले, मैं तो ना जाऊँ किसी दर पे,

बोलो राम, जय जय राम, बोलो राम जन्म सफल होगा बन्दे, मन में राम बसा ले, भोले राम, आजा राम, भोले राम हे राम नाम
