
धूम मची है धूम माँ के दर: भजन (Dhoom Machi Hai Dhoom Maa Ke Dar)
धूम मची है धूम माँ के दर, धूम मची है धूम ॥ श्लोक – कहीं न चैन मिला, जब हमको इस ज़माने में, तो बड़ा

धूम मची है धूम माँ के दर, धूम मची है धूम ॥ श्लोक – कहीं न चैन मिला, जब हमको इस ज़माने में, तो बड़ा

लाली लाली लाल चुनरियाँ, कैसे ना माँ को भाए ॥ माई मेरी सूचियाँ जोतावाली माता तेरी सदा ही जय, माई मेरी उँचियाँ पहाड़ावाली माता, तेरी

उंचिया पहाड़ा वाली माँ, हो अम्बे रानी, थोड़ी सी मैहर कर दे, कितनी उम्मीदे लाया, कितने ही सपने, थोड़ी सी मैहर कर दे ॥ उंचिया

सुनके भक्तो की पुकार, होके नंदी पे सवार, काशी नगरी से, आए है शिव शम्भू, सुनके भक्तो की पुकार ॥ भस्मी रमाए देखो, डमरू बजाए,

लूटरू महादेव जय जय, लुटरू महादेव जी, लूटूरू महादेव चलो, लूटूरु महादेव जी, सारी दुनियां ध्याए, गाए गुण महादेव जी, लुटरू महादेव चलो, लूटरु महादेव

गलियां जरा सजा दो, महाकाल आ रहे है ॥ दोहा – महाकाल की सवारी, निकली भ्रमण को आज, राहें जरा सजा लो, आ रहे राजाधिमहाराज,

तुम करलो प्रभु से प्यार, अमृत बरसेगा, बरसेगा नित बरसेगा, तुम करलों प्रभु से प्यार, अमृत बरसेगा ॥ दया धर्म से प्रीति करलो, भव सागर
