
मुझे कौन जानता था तेरी बंदगी से पहले: भजन (Mujhe Kaun Poochhta Tha Teri Bandagi Se Pahle)
मुझे कौन जानता था, तेरी बंदगी से पहले, मैं बुझा हुआ दिया था, तेरी बंदगी से पहले ॥ मैं तो खाख था जरा सी, मेरी

मुझे कौन जानता था, तेरी बंदगी से पहले, मैं बुझा हुआ दिया था, तेरी बंदगी से पहले ॥ मैं तो खाख था जरा सी, मेरी

निराले शम्भु को बिगड़ी, बना देना भी आता है ॥ श्लोक – गुरुर ब्रह्मा गुरुर विष्णु, गुरुर देवो महेश्वरः, गुरुर साक्षात परम ब्रह्म, तस्मै श्री

हे शिव शंकर भोले बाबा, मैं तेरे गुण गाऊं, ऐसा वर दे इन चरणों में, ऐसा वर दे इन चरणों में, सगरे जनम बिताऊं, हे

प्रेम हो तो श्री हरि का प्रेम होना चाहिए जो बने विषयों के प्रेमी उनको रोना चाहिए मखमली गद्दे पे सोये ऐश और आराम से

हे शिवशंकर हे करुणाकर, हे परमेश्वर परमपिता हर हर भोले नमः शिवाय, नमः शिवाय ओम नमः शिवाय हे शिव शम्भू संकटहर्ता, विघ्नविनाशी मंगलकर्ता जिस पर

जिनके हृदय हरि नाम बसे, तिन और का नाम लिया ना लिया । जिनके हृदय हरि नाम बसे, जिन के द्वारे पर गंग बहे, जिन

राम सीता और लखन वन जा रहे, हाय अयोध्या में अँधेरे छा रहे, राम सीता और लखन वन जा रहे ॥ मुर्ख कैकई ने किया
