
जय श्री वल्लभ, जय श्री विट्ठल, जय यमुना श्रीनाथ जी – भजन (Jai Shri Vallabh Jai Shri Vithal, Jai Yamuna Shrinathji)
जय श्री वल्लभ, जय श्री विट्ठल, जय यमुना श्रीनाथ जी । कलियुग का तो जीव उद्धार्या, मस्तक धरिया हाथ जी ॥ मोर मुकुट और काने

जय श्री वल्लभ, जय श्री विट्ठल, जय यमुना श्रीनाथ जी । कलियुग का तो जीव उद्धार्या, मस्तक धरिया हाथ जी ॥ मोर मुकुट और काने

श्याम के बिना तुम आधी, तुम्हारे बिना श्याम आधे, राधे राधे राधे राधे, राधे राधे राधे राधे, आठो पहर जो रहे अंग संग, उस सांवरे

हम तो दीवाने मुरलिया के, अजा अजा रे लाल यशोदा के । तेरी बाट जोहे राधा गोरी, वो तो आई है चोरी चोरी । कहा

कबहुँ ना छूटी छठि मइया, हमनी से बरत तोहार हमनी से बरत तोहार तहरे भरोसा हमनी के, छूटी नाही छठ के त्योहार छूटी नाही छठ

पहिले पहिल हम कईनी, छठी मईया व्रत तोहार । करिहा क्षमा छठी मईया, भूल-चूक गलती हमार । सब के बलकवा के दिहा, छठी मईया ममता-दुलार

आदितमल के पक्की रे सड़कीया, कुजडा छानेला दोकान, कुजडा छानेला दोकान । आदितमल के पक्की रे सड़कीया, कुजडा छानेला दोकान, कुजडा छानेला दोकान । घोडवा

डोमिन बेटी सुप नेने ठाढ़ छै उगऽ हो सुरुज देव, अरघ केर बेर हो पुजन केर बेर मालिन बेटी फूल नेने ठाढ़ छै उगऽ हो
