
राधिके ले चल परली पार – भजन (Radhike Le Chal Parli Paar)
गलियां चारों बंद हुई, मिलूं कैसे हरी से जाये । ऊंची नीची राह रपटीली, पाओ नहीं ठहराए । सोच सोच पग धरु जतन से, बार

गलियां चारों बंद हुई, मिलूं कैसे हरी से जाये । ऊंची नीची राह रपटीली, पाओ नहीं ठहराए । सोच सोच पग धरु जतन से, बार

अरे रे मेरी जान है राधा, तेरे पे क़ुर्बान मैं राधा, अरे रे मेरी जान हैं राधा, तेरे पे क़ुर्बान मैं राधा, रह न सकूंगा

राधा रानी को भयो अवतार, बधाई बाज रही, ऐ जी हाँ बधाई बाज रही, ऐ री हाँ बधाई बाज रही, चलो रे चलो रे भानु

रघुनन्दन राघव राम हरे सिया राम हरे सिया राम हरे । रघुनन्दन राघव राम हरे सिया राम हरे सिया राम हरे । रघुनन्दन राघव राम

जहाँ ले चलोगे, वही मैं चलूँगा, जहाँ नाथ रख लोगे, वही मैं रहूँगा । ये जीवन समर्पित, चरण में तुम्हारे, तुम्ही मेरे सर्वस्व, तुम्ही प्राण

श्री राम नवमी, विजय दशमी, सुंदरकांड, रामचरितमानस कथा, हनुमान जन्मोत्सव और अखंड रामायण के पाठ में प्रमुखता से गाये जाने वाला भजन। राम कहानी सुनो

हरि तुम हरो जन की भीर। द्रोपदी की लाज राखी, तुम बढ़ायो चीर॥ हरि तुम हरो जन की भीर… भगत कारण रूप नरहरि धर्यो आप
