विद्यां ददाति विनयं,
विनयाद् याति पात्रताम् ।
पात्रत्वात् धनमाप्नोति,
धनात् धर्मं ततः सुखम् ॥
हिन्दी भावार्थ:
विद्या विनय देती है, विनय से पात्रता आती है, पात्रता से धन आता है, धन से धर्म होता है, और धर्म से सुख प्राप्त होता है।
भजन: मेरो लाला झूले पालना, नित होले झोटा दीजो ! (Mero Lala Jhule Palna Nit Hole Jhota Dijo)
मेरो मन राम ही राम रटे रे: भजन (Mero Maan Ram Hi Ram Rate Re)
श्री शनि देव: आरती कीजै नरसिंह कुंवर की (Shri Shani Dev Aarti Keejai Narasinh Kunwar Ki)
Post Views: 353








