हरि कर दीपक,
बजावें संख सुरपति,
गनपति झाँझ,
भैरों झालर झरत हैं ।
नारदके कर बीन,
सारदा गावत जस,
चारिमुख चारि वेद,
बिधि उचरत हैं ॥
षटमुख रटत,
ससहस्रमुख सिव सिव,
सनक-सनंदनादि,
पाँयन परत हैं ।
बालकृष्ण तीनि लोक,
तीस और तीनि कोटि,
एते शिवशंकरकी,
आरति करत हैं ॥
जिस घर में मैया का, सुमिरन होता: भजन (Jis Ghar Mein Maiya Ka Sumiran Hota)
मैया री मैया एक खिलौना दिलवा दे - भजन (Maiya Ri Maiya Ek Khilona Dilwa De)
कृष्ण कन्हैया बंसी बजैया - भजन (Krishna Kanhaiya Bansi Bajaiya)
Post Views: 320








