बोला प्रभु से यूँ केवट,
यह विनती है सरकार,
चरण धुलाओ राम जी,
जाना हो जो पार ॥
बिना चरण धोए मैं रामजी,
नाव में नही बिठाऊंगा,
बन जाए जो नाव यह नारी,
बिना मौत मर जाऊंगा,
मेरा नाव से घर चलता है,
क्या खाएगा परिवार,
चरण धुलाओ राम जी,
जाना हो जो पार ॥
राम भगत हूं राम आन,
दशरथ जी के जैसे करता,
मरना जीना दुख-सुख जो भी,
इनसे मैं नहीं डरता,
उतराई भी ना लूंगा,
मानूंगा मैं आभार,
चरण धुलाओ राम जी,
जाना हो जो पार ॥
हार गए भगवान भगत से,
अपना चरण धुलाते हैं,
धन्य है केवट पुष्प देवता,
अंबर से बरसाते हैं,
परिवार सहित केवट ने,
किया पितरों का उद्धार,
चरण धुलाओ राम जी,
जाना हो जो पार ॥
एक भगत परिवार में हो तो,
सारा कुल तर जाता है,
प्रभु से विमुख अधम जीवन,
धरती का भार बढ़ाता है,
शंभू जिस दिन आओगे,
क्या देखेगा यह संसार,
चरण धुलाओ राम जी,
जाना हो जो पार ॥
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बोला प्रभु से यूँ केवट,
यह विनती है सरकार,
चरण धुलाओ राम जी,
जाना हो जो पार ॥








