कारे से लाल बनाए गयी रे,
गोरी बरसाने वारी,
बरसाने वारी,गोरी बरसाने वारी ॥
छीन मुकुट, सिर धरी चंद्रिका,
बिंदिया भाल लगाए गयी रे,
गोरी बरसाने वारी ॥
कारे से लाल बनाए गयी रे ॥
नाक बेसार गाल माए कांचुकी,
उपर से चूनर उड़ाए गयी रे,
गोरी बरसाने वारी ॥
कारे से लाल बनाए गयी रे ॥
नारी बनाए, जोड़ के नाता,
उपर से ठेंगा दिखाए गयी रे,
गोरी बरसाने वारी ॥
मंत्र पुष्पांजलि - ॐ यज्ञेन यज्ञमयजन्त (Mantra Pushpanjali)
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पुरुषोत्तम मास माहात्म्य कथा: अध्याय 15 (Purushottam Mas Mahatmya Katha: Adhyaya 15)
कारे से लाल बनाए गयी रे ॥
नारायण मन फिर भी ना मानयो
हस के कंठ लगाए गयी रे
गोरी बरसाने वारी
कारे से लाल बनाए गयी रे,
गोरी बरसाने वारी
बरसाने वारी,गोरी बरसाने वारी
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