जिनका मैया जी के चरणों से संबंध हो गया ।
उनके घर में आनंद ही आनंद हो गया ॥
माँ की शक्ति को जो भी, प्रणाम करते,
माँ की भक्ति में मन को, जो भी रंगते ।
माँ की किरपा से तन मन प्रसन्न हो गया,
उनके घर में आनंद ही आनंद हो गया ॥
जिनका मैया जी के चरणों से संबंध हो गया ।
उनके घर में आनंद ही आनंद हो गया ॥
जो भी श्रद्धा से आता माँ के दरबार में,
कभी ठोकरे ना खाए इस संसार में ।
उसका रास्ता बुराई का बंद हो गया,
उनके घर में आनंद ही, आनंद हो गया ॥
जिनका मैया जी के चरणों से संबंध हो गया ।
उनके घर में आनंद ही आनंद हो गया ॥
माँ को ध्यानु ने ध्याया है सुर ताल से,
निकले भक्ति के स्वर उसकी खड़ताल से ।
माँ का गुणगान छैनो का छंद हो गया,
उनके घर में आनंद ही आनंद हो गया ॥
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श्री तुलसी स्तोत्रम् (Shri Tulsi Stotram)
जिनका मैया जी के चरणों से संबंध हो गया ।
उनके घर में आनंद ही आनंद हो गया ॥
माँ की ज्योति मिटाती है अंधकार को,
कोई विरला ही जाने लख्खा माँ के प्यार को,
ॐ शर्मा को दर ये पसंद हो गया,
उनके घर में, आनंद ही आनंद हो गया ॥
जिनका मैया जी के चरणों से संबंध हो गया ।
उनके घर में आनंद ही आनंद हो गया ॥








