तुम्हीं में ये जीवन जिए जा रहा हूँ
जो कुछ दे रहें हो लिए जा रहा हूँ ॥
तुम्हीं से चला करती प्राणों की धड़कन
तुम्हीं से सचेतन अहंकार तन मन
तुम्हीं में ये दर्शन…
तुम्हीं में ये दर्शन किए जा रहा हूँ
जो कुछ दे रहें हो लिए जा रहा हूँ ॥
तुम्हीं में ये जीवन जिए जा रहा हूँ
जो कुछ दे रहें हो लिए जा रहा हूँ ॥
असत के सदा आश्रय हो तुम्हीं सत
तुम्हीं में विषय विष, तुम्हीं में है अमृत
पिलाते हो जो कुछ…
पिलाते हो जो कुछ पिए जा रहा हूँ
जो कुछ दे रहें हो लिए जा रहा हूँ ॥
तुम्हीं में ये जीवन जिए जा रहा हूँ
जो कुछ दे रहें हो लिए जा रहा हूँ ॥
हनुमान चालीसा (Hanuman Chalisa)
जाम्भोजी का भ्रमण करना (काबूल में जीव हत्या बंद करवाना) भाग 1
पुरुषोत्तम मास माहात्म्य कथा: अध्याय 24 (Purushottam Mas Mahatmya Katha: Adhyaya 24)
जहाँ भी रहूँ ध्यान मैं तुमको देखूँ
तुम्हीं में हूँ मैं ज्ञान मैं तुमको देखूँ
पथिक मैं ये अर्ज़ी…
पथिक मैं ये अर्ज़ी दिए जा रहा हूँ
जो कुछ दे रहें हो लिए जा रहा हूँ ॥
तुम्हीं में ये जीवन जिए जा रहा हूँ
जो कुछ दे रहें हो लिए जा रहा हूँ ॥








