विद्यां ददाति विनयं,
विनयाद् याति पात्रताम् ।
पात्रत्वात् धनमाप्नोति,
धनात् धर्मं ततः सुखम् ॥
हिन्दी भावार्थ:
विद्या विनय देती है, विनय से पात्रता आती है, पात्रता से धन आता है, धन से धर्म होता है, और धर्म से सुख प्राप्त होता है।
सांवली सूरत पे मोहन, दिल दीवाना हो गया - भजन (Sanwali Surat Pe Mohan Dil Diwana Ho Gaya)
भज गोविन्दम्, भज गोविन्दम् - भजन (Bhaja Govindam, Bhaja Govindam)
तुलसी विवाह पौराणिक कथा (Tulsi Vivah Pauranik Katha)
Post Views: 382








