विद्यां ददाति विनयं,
विनयाद् याति पात्रताम् ।
पात्रत्वात् धनमाप्नोति,
धनात् धर्मं ततः सुखम् ॥
हिन्दी भावार्थ:
विद्या विनय देती है, विनय से पात्रता आती है, पात्रता से धन आता है, धन से धर्म होता है, और धर्म से सुख प्राप्त होता है।
रास कुन्जन में ठहरायो - भजन (Raas Kunjan Me Thahrayo)
जयपुर की चुनरिया मैं लाई शेरावालिये: भजन (Jaipur Ki Chunariya Me Layi Sherawaliye)
मैया आवेगी मैया आवेगी: भजन (Maiya Aavegi Maiya Aavegi)
Post Views: 294








