
सखि चलो नंद के द्वार – भजन (Sakhi Chalo Nand Ke Dwar)
सखि चलो नंद के द्वार, ओ द्वार, लाला के दर्शन कर आवें, लाला के दर्शन कर आवें ॥ यशोदा ने लाला जायो है, यशोदा ने

सखि चलो नंद के द्वार, ओ द्वार, लाला के दर्शन कर आवें, लाला के दर्शन कर आवें ॥ यशोदा ने लाला जायो है, यशोदा ने

गोबिंद चले चरावन गैया । दिनो है रिषि आजु भलौ दिन, कह्यौ है जसोदा मैया ॥ उबटि न्हवाइ बसन भुषन, सजि बिप्रनि देत बधैया ।

धन जोबन और काया नगर की, कोई मत करो रे मरोर ॥ क्यूँ चले से आंगा पांगा, चिता बिच तने धर देंगे नंगा, एक अग्नि

जगत के रंग क्या देखूं, तेरा दीदार काफी है । क्यों भटकूँ गैरों के दर पे, तेरा दरबार काफी है ॥ नहीं चाहिए ये दुनियां

मेरा हाथ पकड़ ले रे, कान्हा दिल मेरा घबराये, काले काले बादल, गम के बादल, सिर पे मेरे मंडराये, ॥ मेरा हाथ पकड़ लें रे,

जीवन है तेरे हवाले, मुरलिया वाले, जीवन हैं तेरे हवाले, मुरलिया वाले । हम कठ पुतली तेरे हाथ की, हम कठ पुतली तेरे हाथ की,

रीझा भरी घडी यह आई, घर घर होई रोशनाई मात यशोदा लल्ला जाया, सुनंदा ने थाल वजायी कान्हा वे असां तेरा जन्मदिन मनावणा मोहना वे
