
जयपुर से लाई मैं तो चुनरी: भजन (Jaipur Se Layi Main Chunri)
जयपुर से लाई मैं तो, चुनरी रंगवाई के, गोटा किनारी अपने, हाथो लगवाई के, मैया को ओढ़ाउंगी, द्वारे पे जाइके ॥ चंदा की किरणों से,

जयपुर से लाई मैं तो, चुनरी रंगवाई के, गोटा किनारी अपने, हाथो लगवाई के, मैया को ओढ़ाउंगी, द्वारे पे जाइके ॥ चंदा की किरणों से,

भेजा है बुलावा, तूने शेरा वालिए ओ मैया तेरे दरबार, में हाँ तेरे दीदार, कि मैं आऊंगा कभी न फिर जाऊँगा भेजा है बुलावा, तूने

चौसठ जोगणी रे भवानी, देवलिये रमजाय, घूमर घालणि रे भवानी, देवलिये रमजाय ॥ देवलिये रमजाय म्हारे, आंगणिये रमजाय, चौसठ जोगणी रे भवानी, देवलिये रमजाय, घूमर

दृष्टि हम पे दया की माँ डालो, बडी संकट की आई घड़ी है । द्वार पर तेरे हम भी खड़े है, आँखो में आँसुओ कि

या देवी सर्वभूतेषु, दया-रूपेण संस्थिता । नमस्तस्यै नमस्तस्यै, नमस्तस्यै नमो नमः ॥ दुर्गा दुर्गति दूर कर, मंगल कर सब काज । मन मंदिर उज्वल करो,

देवो में सबसे बड़े, मेरे महादेव हैं, सर्पो की गले माल, चंद्रमा सोहे भाल, अद्भुत महादेव है ॥ हे त्रिपुरारी हे गंगाधारी, सृष्टि के शिव

मेरे भोले बाबा जटाधारी शम्भू, हे नीलकंठ त्रिपुरारी हे शम्भू ॥ नंदी की सवारी है, गौरा मैया साथ है, डोर ये जीवन की, तेरे ही
