
कैलाश के निवासी नमो बार बार हूँ (Kailash Ke Nivasi Namo Bar Bar Hoon)
कैलाश के निवासी नमो बार बार हूँ, आये शरण तिहारी प्रभु तार तार तू, भगतो को कभी शिव ने निराश न किया, माँगा जिसे चाहा

कैलाश के निवासी नमो बार बार हूँ, आये शरण तिहारी प्रभु तार तार तू, भगतो को कभी शिव ने निराश न किया, माँगा जिसे चाहा

ऊँचे ऊँचे मंदिर तेरे, ऊँचा तेरा धाम, हे कैलाश के वासी भोले, हम करते है तुझे प्रणाम । अजब है तेरी माया, इसे कोई समझ

अजब है भोलेनाथ ये, दरबार तुम्हारा, दरबार तुम्हारा, भूत प्रेत नित करे चाकरी, सबका यहाँ गुज़ारा, अजब है भोलेंनाथ ये, दरबार तुम्हारा, दरबार तुम्हारा ॥

भोले नाथ का मैं बनजारा, छोड़ दिया मैंने जग सारा, पता बता दो नील कंठ का, पता बता दो नील कंठ का, मैं जाऊ शिव

छोटी सी मेरी पार्वती, शंकर की पूजा करती थी, निर्जल रहकर निश्छल मन से, नित ध्यान प्रभू का धरती थी, छोटी सी मेरी पारवती, शंकर

किस विधि वंदन करू तिहारो, औघड़दानी त्रिपुरारी बलिहारी – बलिहारी जय महेश बलिहारी ॥ नयन तीन उपवीत भुजंगा, शशि ललाट सोहे सिर गंगा मुंड माल

लेके गौरा जी को साथ भोले-भाले भोले नाथ, काशी नगरी से आए हैं शिव शंकर। नंदी पे सवार होके डमरू बजाते, चले आ रहे हैं
