
कोई ऐसी खोल नहीं है: भजन (Koi Aisi Khol Nahin)
कोई ऐसी खोल नहीं है, जिसमें तू छुप पायेगा ॥ दोहा – शीश ढको तो पाँव खुले रे, पाँव ढको तो शीश, अजब चदरिया तृष्णा

कोई ऐसी खोल नहीं है, जिसमें तू छुप पायेगा ॥ दोहा – शीश ढको तो पाँव खुले रे, पाँव ढको तो शीश, अजब चदरिया तृष्णा

किरपा मिलेगी श्री राम जी की, भक्ति करो, भक्ति करो, दया मिलिगी हनुमान जी की, राम जपो, राम जपो, दुष्ट दलन हनुमान है, हनुमान मेरे,

दुनिया मे देव हजारो हैं, बजरंग बली का क्या कहना इनकी शक्ति का क्या कहना, इनकी भक्ति का क्या कहना दुनिया मे देव हजारो हैं,

यदि नाथ का नाम दयानिधि है, तो दया भी करेंगे कभी ना कभी, दुखहारी हरी, दुखिया जन के, दुख क्लेश हरेगें कभी ना कभी ॥

श्री राम से कह देना, एक बात अकेले में, रोता है भरत भैया, दिन रात अकेले में, श्रीं राम से कह देना, एक बात अकेले

जय सियाराम, बोलो जय सियाराम जय सियाराम, बोलो जय सियाराम राम के दुलारे, माता जानकी के प्यारे, तुम्हे नमन हजारो बार है । जय बोलो

भगवा रंग चढ़ा है ऐसा, और रंग ना भाएगा, जय श्री राम के नाम का नारा, घर घर से अब आएगा, अयोध्या की नगरी में
