
म्हारे सर पर है मैया जी रो हाथ: भजन (Mhare Sar Pe Hai Maiyaji Ro Hath)
म्हारे सर पर है मैया जी रो हाथ, कोई तो म्हारो कई करसी ॥ जे कोई म्हारी मैया जी ने, साँचे मन से ध्यावे, काल

म्हारे सर पर है मैया जी रो हाथ, कोई तो म्हारो कई करसी ॥ जे कोई म्हारी मैया जी ने, साँचे मन से ध्यावे, काल

मैया के चरणों में, झुकता है संसार, तीनों लोक में होती, माँ तेरी जय जयकार ॥ सुख में तो मैया तुझसे, दूर रहा मैं, धन

बनकर के धूल के कण, चरणों से लिपट जाऊं, तेरे आँचल की छैया, मैं आके सिमट जाऊं, बनकर के धुल के कण, चरणों से लिपट

तेरे चरणों में शीश मैं झुकाऊं, तेरे ही गुण गाऊं, ओ माता मेरी लाज रख ले, लाज रख ले, और किसके द्वारे पे मैं जाऊं,

पायो जी मैंने राम रतन धन पायो । पायो जी मैंने राम रतन धन पायो । वस्तु अमोलिक दी मेरे सतगुरु । कृपा कर अपनायो

माँ ऊँचे पर्वत वाली, करती शेरो की सवारी, अम्बे माँ, घर में पधारो मेरी माँ, अम्बे माँ, घर में पधारो मेरी माँ ॥ तेरे नाम

चौकी तेरी माता रानिये, तेरे बच्चो ने कराई है ॥ दोहा – प्रथमे गुरु वंदन करूँ, द्वितीये आद गणेश, त्रितये सुमिरूँ शारदा, कंठ करो प्रवेश
