
कि बन गए नन्दलाल लिलिहारि – भजन (Ki Ban Gaye Nandlal Lilihari)
कि बन गए नन्दलाल लिलिहारि, री लीला गुदवाय लो प्यारी । दृगन पै लिख दे दीनदयाल नासिका पै लिख दे नन्दलाल कपोलन पै लिख दे

कि बन गए नन्दलाल लिलिहारि, री लीला गुदवाय लो प्यारी । दृगन पै लिख दे दीनदयाल नासिका पै लिख दे नन्दलाल कपोलन पै लिख दे

॥ श्याम स्तुति ॥ हाथ जोड़ विनती करूं सुणियों चित्त लगाय, दास आ गयो शरण में रखियो इसकी लाज, धन्य ढूंढारो देश हैं खाटू नगर

“….बोरी मत जाने , वृषभानु की किशोरी छे होरी में तोसो काहु भाँति नही हारेगी लाल तोहे पकर नचावे, गाल गुलचा लगावे तोहे राधिका बानवे,

कारे से लाल बनाए गयी रे, गोरी बरसाने वारी, बरसाने वारी,गोरी बरसाने वारी ॥ छीन मुकुट, सिर धरी चंद्रिका, बिंदिया भाल लगाए गयी रे, गोरी

नेक आगे आ, श्याम तोपे रंग डारुं, नेक आगे आ, हाँ रे, नेक आगे आ, हम्बे नेक आगे आ, श्याम तोपे रंग डाँरू, नेक आगे

होली खेल रहे बांकेबिहारी आज रंग बरस रहा , और झूम रही दुनिया सारी, आज रंग बरस रहा ॥ अबीर गुलाल के बादल छा रहे

Muthai Tharu Patthi Thirunagai
