
मुरली वाले ने घेर लयी, अकेली पनिया गयी: भजन (Murli Wale Ne Gher Layi)
मुरली वाले ने घेर लयी अकेली पनिया गयी ॥ मै तो गयी थी यमुना तट पे कहना खड़ा था री पनघट पे बड़ी मुझ को

मुरली वाले ने घेर लयी अकेली पनिया गयी ॥ मै तो गयी थी यमुना तट पे कहना खड़ा था री पनघट पे बड़ी मुझ को

फूलों में सज रहे हैं, श्री वृन्दावन बिहारी, और साथ सज रही है, वृषभानु की दुलारी ॥ टेढ़ा सा मुकुट सर पर, रखा है किस

वृंदावनी वेणु कवणाचा माये वाजे । वेणुनादें गोवर्धनु गाजे ॥ पुच्छ पसरूनि मयूर विराजे । मज पाहता भासती यादवराजे ॥ तृणचारा चरूं विसरली । गाई-व्याघ्र

लचकि लचकि आवत मोहन, आवे मन भावे लचकि लचकि आवत मोहन, आवे मन भावे लचकि लचकि आवत मोहन मोहन अधर धरत मुरली, मोहन आधार धरत

नटवर नागर नंदा, भजो रे मन गोविंदा, श्याम सुंदर मुख चंदा, भजो रे मन गोविंदा, नटवर नागर नन्दा, भजो रे मन गोविंदा, श्याम सुंदर मुख

जरा देर ठहरो राम तमन्ना यही है अभी हमने जी भर के देखा नहीं है ॥ कैसी घड़ी आज जीवन की आई । अपने ही

लागी लागी है लगन, म्हाने श्याम नाम की, भागी भागी म्हारे हिवड़े ने, यारी श्याम की, म्हारे नैणा के झरोखें में है, सूरत श्याम की,
