
शिव अमृतवाणी (Shiv Amritwani)
॥ भाग १ ॥ कल्पतरु पुन्यातामा, प्रेम सुधा शिव नाम हितकारक संजीवनी, शिव चिंतन अविराम पतिक पावन जैसे मधुर, शिव रसन के घोलक भक्ति के

॥ भाग १ ॥ कल्पतरु पुन्यातामा, प्रेम सुधा शिव नाम हितकारक संजीवनी, शिव चिंतन अविराम पतिक पावन जैसे मधुर, शिव रसन के घोलक भक्ति के

मन फूला फूला फिरे, जगत में कैसा नाता रे ॥ मन फूला फूला फिरे, जगत में कैसा नाता रे ॥ माता कहे यह पुत्र हमारा,

मन मोहन मूरत तेरी प्रभु, मिल जाओगे आप कहीं ना कहीं । यदि चाह हमारे दिल में है, तूम्हे ढूँढ ही लेंगे कहीं ना कहीं

राम तुम बड़े दयालु हो, नाथ तुम बड़े दयालु हो, हरी जी तुम बड़े दयालु हो ॥ और ना कोई हमारा है, मुझे इक तेरा

जय राधे, जय कृष्ण, जय वृंदावन । श्री गोविंदा, गोपीनाथ, मदन-मोहन ॥ श्याम-कुंड, राधा-कुंड, गिरि-गोवर्धन । कालिंदी जमुना जय, जय महावन ॥ जय राधे, जय

बनवारी रे, जीने का सहारा तेरा नाम रे, मुझे दुनिया वालों से क्या काम रे ॥ झूठी दुनिया, झूठे बंधन, झूठी है ये माया, झूठा

जरा इतना बता दे कान्हा, कि तेरा रंग काला क्यों । श्लोक- श्याम का काला बदन, और श्याम घटा से काला, शाम होते ही, गजब
