
साखी – तारण हार थला शिर आयो,बाबो जंभू दीपे प्रगट्यो(Bishnoi jambhoji Saakhi)
साखी – तारण हार थला शिर आयो तारण हार थलां शिर आयो, जे कोई तिरै सो तिरियो जीवन। जेजीवड़ा को भल

साखी – तारण हार थला शिर आयो तारण हार थलां शिर आयो, जे कोई तिरै सो तिरियो जीवन। जेजीवड़ा को भल

साखी विष्णु विसार मत जाई ये प्राणी विष्णु विसार मत जाइये प्राणी, तो सिर मोटो दावो जीवने ।

साखी – आओ मिलो साधो ओमलो साखी सावण संत जल, सतगुरू सरवर तीर । मन धोबी तन पाटडो,

साखी – आये म्हारे जम्भ गुरु जगदीश प्रातःकाल- आये म्हारे जंभ गुरू जगदीश । सुर नर

अमावस्या व्रत कथा महात्म्य ( अमावस्या क्यों रखनी चाहिए ) एक समे चाली, कोई कह तीरथ को बड़ो
