सखी री बांके बिहारी से
हमारी लड़ गयी अंखियाँ ।
बचायी थी बहुत लेकिन
निगोड़ी लड़ गयी अखियाँ ॥
ना जाने क्या किया जादू
यह तकती रह गयी अखियाँ ।
चमकती हाय बरछी सी
कलेजे गड़ गयी आखियाँ ॥
चहू दिश रस भरी चितवन
मेरी आखों में लाते हो ।
कहो कैसे कहाँ जाऊं
यह पीछे पद गयी अखियाँ ॥
भले तन से निकले प्राण
मगर यह छवि ना निकलेगी ।
अँधेरे मन के मंदिर में
मणि सी गड़ गयी अखियाँ ॥
दास तेरे है गजानन, ध्यान धरते है: भजन (Das Tere Hai Gajanan Dhyan Dharte Hai )
मेरे संग संग चलती: भजन (Mere Sang Sang Chalti)
गंगा की धारा का समराथल पर आगमन(Samrathl par Ganga ji)
सखी री बांके बिहारी से
हमारी लड़ गयी अंखियाँ ।
बचायी थी बहुत लेकिन
निगोड़ी लड़ गयी अखियाँ ॥
Post Views: 728








