॥ सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः ॥

भजन · आरती · मंत्र

पकड़ लो बाँह रघुराई, नहीं तो डूब जाएँगे – भजन (Pakadlo Bah Raghurai, Nahi Too Doob Jayenge)

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पकड़ लो बाँह रघुराई,
नहीं तो डूब जाएँगे ।

डगर ये अगम अनजानी,
पथिक मै मूड अज्ञानी ।
संभालोगे नही राघव,
तो कांटे चुभ जाएँगे ।
पकड़ लो बाँह रघुराई,
नहीं तो डूब जाएँगे ।

नहीं बोहित मेरा नौका,
नहीं तैराक मै पक्का ।
कृपा का सेतु बंधन हो,
प्रभु हम खूब आएँगे ।
पकड़ लो बाँह रघुराई,
नहीं तो डूब जाएँगे ।

नहीं है बुधि विधा बल,
माया में डूबी मती चंचल ।
निहारेंगे मेरे अवगुण तो,
प्रभु जी ऊब जाएँगे ।
पकड़ लो बाँह रघुराई,
नहीं तो डूब जाएँगे ।

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प्रतीक्षारत है ये आँगन,
शरण ले लो सिया साजन ।
शिकारी चल जिधर प्रहलाद,
जी भूल जाएँगे ।
पकड़ लो बाँह रघुराई,
नहीं तो डूब जाएँगे ।
नहीं तो डूब जाएँगे,
नहीं तो डूब जाएँगे ।

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Sandeep Bishnoi

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