मंगल को जन्मे,
मंगल ही करते,
मंगलमय भगवान,
जय हनुमान, जय हनुमान,
जय हनुमान, जय जय हनुमान ॥
मंगल को जन्में,
मंगल ही करते,
मंगलमय भगवान,
जय हनुमान, जय हनुमान,
जय हनुमान, जय जय हनुमान ॥
कोई तुम्हारे अतुलित बल का,
कर ना सका अनुमान,
नहीं तुमसा कोई चतुर कपीश्वर,
नहीं तुमसा बलवान,
जय हनुमान, जय हनुमान,
जय हनुमान, जय जय हनुमान ॥
मंगल को जन्में,
मंगल ही करते,
मंगलमय भगवान,
जय हनुमान, जय हनुमान,
जय हनुमान, जय जय हनुमान ॥
लाल देह लाली लसे,
अरू धरि लाल लँगूर,
बज्र देह दानव दलन,
जय जय जय कपि सूर ॥
अभयदान दीजै दयालु प्रभु - भजन (Abhaydan Deejai Dayalu Prabhu Shiv Aarti)
श्री जानकीनाथ जी की आरती (Shri Jankinatha Ji Ki Aarti)
पुरुषोत्तम मास माहात्म्य कथा: अध्याय 4 (Purushottam Mas Mahatmya Katha: Adhyaya 4)
मस्तक मणि से दिनमणि लाजे,
अतिशय कुण्डल कानन राजे,
लाल लाल बाना तन साजे,
पूर्ण समर्पित रघुवर काजे,
संकट मोचन देव तुम्हारे,
राजीव लोचन प्राण,
जय हनुमान, जय हनुमान,
जय हनुमान, जय जय हनुमान ॥
मंगल को जन्मे,
मंगल ही करते,
मंगलमय भगवान,
जय हनुमान, जय हनुमान,
जय हनुमान, जय जय हनुमान ॥








