छठ पूजा: काँच ही बाँस बसहर घरवा – छठ गीत (Kanch Ki Bans Basahar Gharwa)

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काँच ही बाँस बसहर घरवा,
हे कदम जुड़े गाछ,
हे कदम जुड़े गाछ ।

काँच ही बाँस बसहर घरवा,
हे कदम जुड़ गाछ,
हे कदम जुड़ गाछ ।

ताही बसहर सुतेले कवन देव,
गोडे मोडे चदर तान,
गोडे मोडे चदर तान ।

पैसी जगावेली कवन देई,
उठी स्वामी भईले बिहान,
उठी स्वामी भईले बिहान ।

गईया दूहन भिनुसहरा,
भईले अरघीया के जून,
भईले अरघीया के जून ।

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तीन दिन के भूखली धनिया,
बाडी जल बिचवे खाड,
बाडी जल बिचवे में खाड ।

थर थर कापेला बदनीया,
ओठवा गई ले झूराए,
ओठवा गई ले झूराए,
ओठवा गई ले झूराए ।

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Sandeep Bishnoi

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