झूलन चलो हिंडोलना, वृषभान नंदनी,
झूलन चलो हिडोलना, वृषभान नंदनी।
सावन की तीज आई, नवघोर घटा छाई,
सावन की तीज आई, नवघोर घटा छाई,
नवघोर घटा छाई,
मेघन झड़ी लगाई, पड़ी बूँद मंदिनी,
॥ झूलन चलो हिडोलना…॥
सुंदर कदम की डारी, झूलो पड़यो है प्यारी,
सुंदर कदम की डारी, झूलो पड़यो है प्यारी,
झूलो पड़यो है प्यारी,
देखो उमर किशोरी, सब दुख निकंदिनि,
॥ झूलन चलो हिडोलना…॥
पहरो सुरंग सारी, मानो विनय हमारी,
पहरो सुरंग सारी, मानो विनय हमारी,
मानो विनय हमारी,
मुखचंद्र की उजियारी, मृदुभाष नंदिनी,
॥ झूलन चलो हिडोलना…॥
Ashadha Sankashti Ganesh Chaturthi Vrat Katha (Ashadha Sankashti Ganesh Chaturthi Vrat Katha)
खेजड़ली में 363 स्त्री पुरुष का बलिदान
केवट ने कहा रघुराई से: भजन (Kewat Ne Kaha Raghurai Se)
झूलन चलो हिंडोलना, वृषभान नंदनी,
झूलन चलो हिडोलना, वृषभान नंदनी।
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