हमने ब्रज के ग्वाले से,
अपना दिल लगाया है,
नींद भी गवाई है,
चैन भी गवाया है,
हमनें ब्रज के ग्वाले से,
अपना दिल लगाया है ॥
दिल मेरा बेकाबू,
हो जाता है उस पर,
देखता है मेरी तरफ,
और मुस्कुराता है,
हमनें ब्रज के ग्वाले से,
अपना दिल लगाया है ॥
कई बार चाहा उसे,
हाले दिल सुनाऊ मैं,
होंठ मेरे खुल ना सके,
सामने जो आया है,
हमनें ब्रज के ग्वाले से,
अपना दिल लगाया है ॥
सब ये समझते है,
वो बांसुरी बजाता है,
पर उसने इशारों से,
हमको बुलाया है,
हमनें ब्रज के ग्वाले से,
अपना दिल लगाया है ॥
तन के तम्बूरे में, दो सांसो की तार बोले - भजन (Tan Ke Tambure Me Do Sanso Ki Tar Bole)
काशी में कैलाशी - भजन (Kaashi Mein Kailashi)
हरि हरि हरि सुमिरन करो - भजन (Hari Hari Hari Sumiran Karo)
हमने ब्रज के ग्वाले से,
अपना दिल लगाया है,
नींद भी गवाई है,
चैन भी गवाया है,
हमनें ब्रज के ग्वाले से,
अपना दिल लगाया है ॥
आरती कुंजबिहारी की | आओ भोग लगाओ प्यारे मोहन | श्री बांके बिहारी तेरी आरती गाऊं | आरती श्री बाल कृष्ण जी की | ॐ जय जगदीश हरे | मधुराष्टकम्: धरं मधुरं वदनं मधुरं | कृष्ण भजन | अच्चुतम केशवं कृष्ण दामोदरं | श्री कृष्णा गोविन्द हरे मुरारी








