हरि हरि, हरि हरि, सुमिरन करो,
हरि चरणारविन्द उर धरो
हरे राम हरे राम रामा रामा हरे हरे
हरे कृष्णा करे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे
हरि की कथा होये जब जहाँ,
गंगा हू चलि आवे तहाँ
हरि हरि, हरि हरि, सुमिरन करो
यमुना सिंधु सरस्वती आवे,
गोदावरी विलम्ब न लावे .
BhaktiBharat Lyrics
ज्योति कलश छलके - भजन (Jyoti Kalash Chhalake)
आओ भोग लगाओ प्यारे मोहन - भोग आरती (Aao Bhog Lagao Mere Mohan: Bhog Aarti)
सर्व तीर्थ को वासा वहां,
सूर हरि कथा होवे जहाँ
हरि हरि, हरि हरि, सुमिरन करो
Post Views: 346








